
फैसला होने से पहले ही मैं भला क्योन हार मान लूँ ...
की जग अभी जीता नही है.. की मैं अभी हारा नही हूँ ...
पर लड़ता हूँ मैं अपनी आत्मा की आवाज से ...
जो याद कराती है मुझे पल पल की बदल गया हूँ मैं ...
महसूस भी नही होता अब तो कुछ भी ...
बस एक शरीर की लाश को घसीटता मैं...
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